बुधवार, 5 मई 2010

वक्त अभी भी वही है

रंग दुनिया के
कई बार बदले
हर दृश्य जिंदगी के
बेहतर निकले
पर मेरे सुख दुःख के
पैमाने
अभी भी वही है

इस धूप को प्रतिदिन
मैंने देखा है
शब्द के हर रूप को
मैंने समझा है
अर्थ के आंच की तासीर
कैसी भी हो
मेरे सहने की क्षमता
अभी भी वही है

रिश्ते व मौसम
का मिजाज
बदलते तो गए
पर मेरा मन व
मेरी आँखे वही है
मै जानती हूँ
वेद की पंक्तिया बदलती नहीं
मेरे जेहन में
तुम्हारे निशां
अभी भी वही है