तुम हमेशा याद आते हो ,
जब भी मै पेन उठाता हूँ
मेरे लिखने से पहले
तुम्हारी आँखे उत्सुक हो जाती है
शब्द
जो शब्द ही रहते है
तुम उन्हें ऐसे दोहराते हो
जैसे उसके अर्थ तुम्हे संतृप्त कर रहे हो
कही कुछ नहीं होता
पर तुम उस पेपर को उठा
व्यथित व संवेदनशील हो जाते हो
समाज व व्यक्ति से जाती हुई
शब्दों की पंक्तियों में
एक शक्ति तो अवश्य ही है
जिसके बल पर तुम ,दूर होकर भी
एक आवाज देते हो
"रुक क्यों गए ,
और लिखो "
और मै इसी से प्रेरित हो जाता हूँ .