रात की गहरी , चीखती
सन्नाटो में
कही कुछ खटकता है
जैसे किसी ने सेंध लगा दी हो
किसी के स्वप्न में
किसी की शांति में
किसी के घर में
किसी के बेसुध नींद में
कही कुनमुना उठता है शिशु
जैसे उससे छीन लिया गया हो
माँ का आँचल
कही अचानक आँख फाड़े
उठ बैठा हो कोई
शायद बुरा सपना है
नींद की रक्षा के लिए ही
रखे गए शख्स के मन में
कही कुछ खटकता है
तो वह स्वत: ही बोल उठता है
जागते रहो
लगता है सूर्य को सोने से
रोक रहा हो
ताकि सबेरा जल्दी हो
और वह निश्चिंत सो सके
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें